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बस ज़रा सा ही सफ़र बाकी है

समंदर पी गए लेकिन अभी शबनम के प्यासे हैं

बात तो उसके गुनाहों की थी

रूह से रूह मिलके चलती है परिन्दों की तरह

चंद सिक्कों से कुछ औकात बन गई होती

काले पहियों सी ख्वाहिशें

हर तरफ जब वो नज़र आने लगे

कोई बतलाए क्या ख्वाबों की कीमत

अभी महफिल में कातिल हैं

Mother's डे तो बस एक दिन का कारोबार है.

बड़ा काफ़िर सनम निकला

अपने इश्क़ ने कमाल कर दिया

जाने वालों को दुआ देता चल

ऐसी होली दिखा रहा है वो

खुदा है तो मै भी हूँ

Teri yaadon se door rehta hoon

कोई उसे बताये तो के माजरा क्या है

कागज की कशतियों में सवार हैं

sabak jisko wafa ka yaad hoga

तुम क्या गये के ज़िन्दगी अंजान हो गयी