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चरागे ज़िन्दगी है जलती बुझती है मचलती है

Jise dhoond rha hoon wo milta nahi

अब पहले कहीं से शराब आये

मुहब्बतें गिनते गिनते थकान हो रही है

शिकारी बनोगे या शिकार बनोगे

मुहब्बत

दिल अपनी रहबरी पे कायम है

तुम्हारे इश्क की सोहबत

तुम्हारे हुस्न के आगे कहां यहा कुछ है

रिश्तों का ज़हर..

muhabbat