मेरी परवाज़ का तू आसमान क्या लेगा



मेरी परवाज़ का तू आसमान क्या लेगा,
मेरे वजूद का तू इम्तेहान क्या लेगा,
तुझे परहेज़ है चाहत से वफ़ादारी से
तू मेरे घर के बराबर मकान क्या लेगा .

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